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बिहार की ऐतिहासिक अज़ादारी नेटवर्क

azaadari.bihar.biz पर सूबा-ए-बिहार के समस्त प्राचीन एवं प्रामाणिक अज़ादारी केंद्रों का भव्य डिजिटल अभिलेखागार।

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प्रादेशिक अज़ादारी इंडेक्स

बिहार के प्रमुख अज़ादारी केंद्रों का अद्यतन डिजिटल संग्रह

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पटना (अज़ीमाबाद)

ऐतिहासिक इमामबाड़े और शब-ए-आशूर की शब-दारी

बिहार की राजधानी पटना (कदीम अज़ीमाबाद) अज़ादारी का सबसे बड़ा मरकज़ है। पटना सिटी के तारीख़ी इमामबाड़े, ज़ुलजनाह के जुलूस और शब-ए-आशूर की शब-दारी देश भर में मशहूर हैं।

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पटना (अलीनगर)

कदीम अज़ाख़ाने और रिवायती मजालिस व जुलूस

पटना का अलीनगर इलाक़ा अपनी कदीम अज़ादारी की रिवायत और अज़ा-ए-हुसैन के लिए जाना जाता है। यहाँ मुहर्रम और अयाम-ए-अज़ा के दौरान बाक़ायदा मजालिस और अलम शरीफ़ के जुलूस बड़े एहतराम के साथ बरामद होते हैं।

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मुजफ्फरपुर

कमरा मोहल्ला इमामबाड़ा और रिवायती सोज़ख़्वानी

मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक कमरा मोहल्ला इमामबाड़े और अन्य मुक़ामात से आशूरा और चेहलुम के तारीख़ी जुलूस बरामद होते हैं। यहाँ की अंजुमनों की सोज़ख़्वानी और मातम का अपना मक़ाम है।

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छपरा (सारण)

ऐतिहासिक इमामबाड़े, कदीम ताज़ियादारी और मातम

सारण (छपरा) ज़िले में अज़ादारी की सदियों पुरानी शानदार रिवायत है। यहाँ मुहर्रम और चेहलुम पर कदीम इमामबाड़ों से ताज़िया, ज़रीह और अलम शरीफ़ के पुर-एहतराम जुलूस बरामद होते हैं।

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सरैया (रोहतास)

क़दीम अज़ाख़ाने और रिवायती ताज़ियादारी व मातम

रोहतास ज़िले का ऐतिहासिक क्षेत्र सरैया अज़ा-ए-हुसैन की प्राचीन और अनुशासित रिवायत के लिए जाना जाता है।

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सीवान

कौमी एकता और अक़ीदत की बेमिसाल रिवायत

सीवान ज़िले और उसके ऐतिहासिक कस्बों में ताज़ियादारी और अलम शरीफ के जुलूस बड़े पैमाने पर निकाले जाते हैं।

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हसनपुरा

चेहलुम और अयाम-ए-अज़ा का मर्कज़ी मुक़ाम

सीवान का हसनपुरा इलाक़ा अपनी पुरख़ुलूस और रिवायती अज़ादारी के लिए पूरे सूबे में मशहूर है।

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पाली

ऐतिहासिक अज़ाख़ाने और मशहूर रिवायती जुलूस

पाली की अज़ादारी अपनी अकीदत, कदीम रिवायत और मशहूर मजालिस के लिए पूरे क्षेत्र में खास पहचान रखती है।

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गया

कदीम अज़ाख़ाने और अलम शरीफ़ के ऐतिहासिक जुलूस

दक्षिण बिहार का एक अहम केंद्र। गया शहर के कदीम अज़ाख़ानों में मुहर्रम के दसों दिन मजालिस और मातम का बाक़ायदा एहतेमाम किया जाता है।

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शेखपुरा

कदीम अज़ाख़ाने और तारीख़ी अंजुमनों का मातम

शेखपुरा ज़िले में कदीम ज़माने से अज़ा-ए-हुसैन की मजबूत रिवायत है।

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हुसैनाबाद

हुसैनाबाद के कदीम तारीख़ी जुलूस और नौहाख़्वानी

हुसैनाबाद का ऐतिहासिक मुक़ाम अपनी रिवायती अज़ादारी के लिए विख्यात है।

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भागलपुर

पूर्वी बिहार की सदियों पुरानी ताज़ियादारी

भागलपुर में अज़ा-ए-हुसैन की सदियों पुरानी रिवायत है।

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दरभंगा

किला घाट के कदीम ज़रीह और ऐतिहासिक वैभव

दरभंगा के किला घाट और दीगर इलाक़ों के इमामबाड़ों से उठने वाले कदीम ज़रीह और अलम के जुलूस आज भी अपनी तारीख़ी शान समेटे हुए हैं।

हिंदुस्तान और बिहार में अज़ादारी का संपूर्ण इतिहास

अज़ादारी की शुरुआत से पहले का मंज़र

कर्बला के अत्यंत दुखद वाक़ये (61 हिजरी) के बाद से ही विश्व के कोने-कोने में अज़ा-ए-हुसैन की पवित्र बुनियाद पड़ चुकी थी।